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International Journal of Social Science Research (IJSSR)

International Journal of Social Science Research (IJSSR)

An Open-Access, Peer-Reviewed & Refereed Bimonthly Journal

ISSN: 3048-9490

Call For Papers - Volume 3, Issue 5 (September - October 2026)
Paper Title

महाकवि भर्तृहरिकृत शृङ्गारशतक में स्त्री-स्वरूप विमर्श

Author(s)बिक्रम बाद्यकर, लिंकन शरणीया.
CountryIndia
Abstract

महाकवि भर्तृहरि कृत “शृंगारशतक” संस्कृत साहित्य की शतककाव्य परंपरा में विशिष्ट है तथा कामशास्त्रीय और दार्शनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण काव्य है। इस ग्रंथ में कवि ने स्त्री के विविध रूपों — सौंदर्य, प्रेम, करुणा, आकर्षण, छल, और वैराग्य का गहन और यथार्थ चित्रण किया है। भर्तृहरि ने स्त्री को केवल भोग या पूजन की वस्तु नहीं माना, बल्कि उसे सृष्टि की रहस्यमयी, चेतन और प्रभावशाली शक्ति के रूप में देखा है। उनके अनुसार, स्त्री जैसे स्वर्ग का द्वार है, वैसे ही नरक का भी; जैसे अमृत है, वैसे ही विष भी। भर्तृहरि का मत है कि जब पुरुष कामभावना से ऊपर उठकर स्त्री को मनुष्य और चेतना के रूप में समझेगा, तभी समाज में संतुलन और समरसता संभव होगी। उन्होंने वेश्याओं के उदाहरण द्वारा यह स्पष्ट किया कि देह का आकर्षण क्षणभंगुर है और उसका परिणाम अंततः मोह-भंग और विषाद में होता है। प्रस्तुत शोधपत्र में भर्तृहरि द्वारा ‘शृंगारशतक’ में प्रतिपादित स्त्री-स्वरूप, उसके द्वंद्वात्मक चरित्र, और पुरुष के प्रति उसकी सामाजिक-आध्यात्मिक भूमिका पर विचार किया जाएगा। इस प्रकार यह अध्ययन केवल शृंगार के रस का विश्लेषण नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन, विवेक और मानवीय संबंधों की गहराई का भी अनुसंधान है।

Subject AreaSanskrit
Issue Volume 3, Issue 1 (January - February 2026)
Published2026/02/18
How to Cite बिक्रम बाद्यकर एवं लिंकन शरणीया (2026). महाकवि भर्तृहरिकृत शृङ्गारशतक में स्त्री-स्वरूप विमर्श. International Journal of Social Science Research (IJSSR), 3(1), 430–438. https://doi.org/10.70558/ijssr.2026.v3.i1.30841
DOI 10.70558/IJSSR.2026.v3.i1.30841
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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