| Article Title |
वर्तमान परिवर्तनशील सामाजिक परिदृश्य में आपराधिक न्याय प्रणाली के अंतर्गत अनुसंधान एजेंसी के रूप में पुलिस के समक्ष विद्यमान चुनौतियों का विश्लेषण |
| Author(s) | Digvijay Singh Sikarwar. |
| Country | India |
| Abstract |
किसी भी देश में आपराधिक न्याय प्रणाली की सफलता में ही विधि के शासन, लोकतंत्र, विकास और मानवाधिकारों की सफलता निहित होती है। आपराधिक विधिशास्त्र का यह मूलभूत सिद्धांत है कि अनुसंधान विवेकपूर्ण, निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित होना चाहिए। यह भारतीय संविधान के आर्टिकल 20 और 21 में निहित संवैधानिक अधिशेष के भी अनुरूप है कि अनुसंधान इस तरह से किया जाना चाहिए कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकारों और अनुसंधान करने के लिए पुलिस की व्यापक शक्तियों के मध्य एक न्यायसंगत संतुलन बनाया जा सके। अपराध स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाली आपराधिक न्याय प्रणाली की एजेंसी अनुसंधान एजेंसी अर्थात पुलिस होती है इसलिए आपराधिक न्यायतंत्र में पुलिस की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होती है। इस शोधपत्र का प्राथमिक उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली के अंतर्गत अनुसंधान एजेंसी के रूप में पुलिस प्रशासन की भूमिका का अध्ययन करने के साथ-साथ अनुसंधान के विधिक दायित्व निर्वहन में आने वाली समस्याओं, बाधाओं और चुनौतियों का परीक्षण करना भी है। अपराधों के निवारण, सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आपराधिक मामलों के अनुसंधान में पुलिस प्रशासन के कार्य-निष्पादन की प्रभावशीलता में अभिवृद्धि करने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तावित करना भी इस शोध अध्ययन का केंद्रीय विषय है। |
| Area | Law |
| Issue | Volume 3, Issue 1 (January - February 2026) |
| Published | 2026/02/24 |
| How to Cite | Sikarwar, D.S. (2026). वर्तमान परिवर्तनशील सामाजिक परिदृश्य में आपराधिक न्याय प्रणाली के अंतर्गत अनुसंधान एजेंसी के रूप में पुलिस के समक्ष विद्यमान चुनौतियों का विश्लेषण. International Journal of Social Science Research (IJSSR), 3(1), 486-494, DOI: https://doi.org/10.70558/IJSSR.2026.v3.i1.30852. |
| DOI | 10.70558/IJSSR.2026.v3.i1.30852 |
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